बिलासपुर की धरती पर उगे उम्मीद के 100 पौधे-HEATS

बिलासपुर की सुबह 5 जुलाई 2026 को कुछ खास लेकर आई। शहर से थोड़ा हटकर, गोपाल मंदिर के पास बंदला रोड पर बसे निहाल कुनाला के इस टुकड़े में उस दिन फावड़े चले, मिट्टी हाथों में उठी और सौ से ज़्यादा छोटे-छोटे पौधे ज़मीन में उतरे। यह कोई सामान्य पौधारोपण कार्यक्रम नहीं था। हिमालयन एजुकेशनल एंड ट्रेनिंग सोसाइटी (HEATS) और वर्मा ज्वेलर्स, सोलन (नरेश चंद वर्मा ग्रुप) ने मिलकर इसे एक ऐसी पहल का रूप दिया जिसका मकसद सिर्फ हरियाली नहीं, बल्कि जंगल के उन साथियों की भूख मिटाना भी था जिन्हें अक्सर हम “समस्या” मान बैठते हैं।

दरअसल जब जंगलों में फल-फूल कम पड़ने लगते हैं, तो वन्यजीव भोजन की तलाश में गाँवों और कस्बों का रुख करते हैं, और यहीं से शुरू होता है इंसान और वन्यजीव के बीच का टकराव। HEATS का मानना है कि इसका हल किसी सरकारी फरमान में नहीं, बल्कि हर आम नागरिक की भागीदारी में छिपा है।

अमरूद के पौधे से हुई शुरुआत

कार्यक्रम की नींव संस्था की कोषाध्यक्ष श्रीमती चम्पा जी ने रखी, जिन्होंने अपने हाथों से पहला अमरूद का पौधा रोपा। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि पर्यावरण बचाना किसी योजना या फाइल का काम नहीं, बल्कि यह हम सबकी नैतिक ज़िम्मेदारी है। अगर सभी मिलकर प्राकृतिक फलदार पौधे लगाए और उनकी सुध लेते रहे, तो आने वाले वर्षों में जंगल के जानवरों को भोजन के लिए बस्तियों तक भटकना नहीं पड़ेगा।

सौ पौधे, एक मकसद

इस अवसर पर निहाल कुनाला की ज़मीन पर फलदार और स्थानीय प्रजातियों के करीब 100 पौधे रोपे गए। आने वाले सालों में जब ये पेड़ बड़े होंगे, तो यही जगह वन्यजीवों के लिए एक प्राकृतिक भोजन-स्थल बन जाएगी, साथ ही इलाके की जैव विविधता और हरियाली को भी नया जीवन मिलेगा।

इसी हरित अभियान को एक स्थायी पहचान देने के उद्देश्य से पौधारोपण के लिए चयनित इस भूमि का नाम “हनुमान वाटिका” रखा गया। भगवान हनुमान शक्ति, सेवा, समर्पण और प्रकृति के प्रति अटूट आस्था के प्रतीक हैं। उनके आदर्शों से प्रेरित यह नामकरण केवल एक औपचारिक घोषणा नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति सामूहिक संकल्प का प्रतीक है। आने वाले वर्षों में जब यहाँ लगाए गए फलदार एवं देशी प्रजातियों के वृक्ष विकसित होंगे, तब हनुमान वाटिका वन्यजीवों के लिए प्राकृतिक भोजन-स्थल, पर्यावरण संरक्षण का जीवंत उदाहरण और समाज के लिए प्रेरणा का केंद्र बनेगी। यहाँ लगाया गया प्रत्येक पौधा प्रकृति, वन्यजीवों और आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी जिम्मेदारी का प्रतीक होगा।

जब पूरा गांव साथ खड़ा हुआ

इस मुहिम की असली ताकत रही इसमें शामिल हुए लोग। वर्मा ज्वेलर्स ने सिर्फ नाम के लिए नहीं, बल्कि दिल से इस अभियान का साथ दिया, और HEATS ने खुलकर कहा कि ऐसा सहयोग समाज के लिए एक मिसाल है। बामटा पंचायत की प्रधान श्रीमती कौशल्या देवी और उपप्रधान श्री विक्रम ठाकुर मौके पर मौजूद रहे, तो वहीं कोसरियां सेक्टर के वार्ड नंबर 6 से पार्षद श्रीमती मीना कुमारी और ओयल पंचायत की प्रधान श्रीमती चम्पा देवी ने भी अपनी सक्रिय भागीदारी से कार्यक्रम को गति दी। श्री नरेंद्र कुमार, श्री दिनेश कुमार, शिक्षाविद् श्री सुशील पुंडीर, श्री राजेश गर्ग और श्री सोहन लाल जैसे स्थानीय लोगों के साथ-साथ श्री राधे-गोविन्द पब्लिक स्कूल की उप-प्रधानाचार्य श्रीमती उषा शर्मा भी इस दिन का हिस्सा बनीं। इस मुहिम में जिन्होंने सबसे ज़्यादा जोश भरा, वे थे स्कूली बच्चे जो अपने अभिभावकों और आस-पड़ोस के लोगों के साथ, हाथों में पौधे लिए पौधारोपण करने पहुंचे।

प्रशासन और राज परिवार का हाथ

HEATS ने ज़िला प्रशासन बिलासपुर और वन विभाग, हिमाचल प्रदेश का दिल से शुक्रिया अदा किया, जिनके सहयोग के बिना इतना बड़ा आयोजन आसान नहीं था। पर एक शुक्रिया और भी था, जिसके मायने बड़े थे—बिलासपुर का राज परिवार, जिन्होंने इस अभियान के लिए अपनी ज़मीन दी। संस्था का कहना है कि यह सिर्फ आज के लिए दिया गया योगदान नहीं है; जब ये पौधे दशकों बाद घने पेड़ बनकर खड़े होंगे, तब भी आने वाली पीढ़ियाँ इस फैसले को उतने ही सम्मान से याद रखेंगी।

HEATS ने किया मीडिया का धन्यवाद

इस मुहिम की पूरी कहानी को गाँव-गाँव, घर-घर तक पहुँचाने में जिन अखबारों, चैनलों, डिजिटल मंचों और फोटोग्राफरों ने साथ दिया, उन्हें भी संस्था ने खासतौर पर धन्यवाद कहा। संस्था की कोषाध्यक्ष श्रीमती चम्पा ने कहा कि आखिर मीडिया की आवाज़ के बिना पर्यावरण का यह संदेश इतनी दूर तक शायद न पहुँच पाता।

जानिए क्या होगा HEATS का अगला पड़ाव

HEATS की कोषाध्यक्ष श्रीमती चम्पा ने कहा कि यह अभियान यहीं नहीं रुकेगा। आने वाले दिनों में बिलासपुर शहर के डियारा सेक्टर और रौड़ा सेक्टर जैसे इलाके में जल्द ही छायादार और देशी प्रजातियों के और भी पेड़ लगाए जाएँगे।

संस्था ने आखिर में हर नागरिक, हर स्कूल, हर पंचायत से एक ही अपील की—

“एक पेड़ केवल प्रकृति के लिए नहीं लगाया जाता। यह आने वाली पीढ़ियों, वन्यजीवों और हमारे अपने सुरक्षित कल के लिए लगाया जाता है। आइए, एक पौधा लगाएं और उसकी देखभाल का वादा निभाकर इस मुहिम का हिस्सा बनें।”

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